मेवाड़ यूनिवर्सिटी पर कृषि मंत्री की छापेमारी, फर्जी डिग्री घोटाले का भांडाफोड़
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित गंगरार की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। राज्य के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी टीम के साथ विश्वविद्यालय में छापा मारा और फर्जी कृषि डिग्रियों के गोरखधंधे का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गहरी चिंता खड़ी कर दी है।
छात्रों से बातचीत में सामने आया घोटाला
कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न कक्षाओं और छात्रावासों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों से सीधी बातचीत की, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मंत्री मीणा ने बताया कि उन्हें एक छात्र ने अपनी डिग्री दिखाई जिसमें 64% अंक दर्ज थे, जबकि उसे दाखिला लिए सिर्फ दो दिन ही हुए थे और उसने कोई परीक्षा तक नहीं दी थी। यह दर्शाता है कि बिना पढ़ाई और परीक्षा के ही डिग्रियां बांटी जा रही थीं।
कृषि पाठ्यक्रमों के नाम पर धोखाधड़ी
यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय में बिना मान्यता प्राप्त कृषि पाठ्यक्रम चलाए जा रहे थे। छात्रों को झांसे में लेकर ऐसे कोर्सों में दाखिला दिया गया, जिनकी कोई वैधता ही नहीं थी। एक छात्र ने बताया कि उसने बीकानेर से एक बिचौलिए के जरिए प्रवेश लिया, जिसने वादा किया था कि एक साल का डिप्लोमा पूरा होते ही उसे खाद और कीटनाशक बेचने का लाइसेंस मिल जाएगा। लेकिन अब उसे समझ आया कि वह एक फर्जीवाड़े का हिस्सा बन गया है।
फर्जी शिक्षा घोटाले के खिलाफ अभियान
राज्य सरकार इन दिनों कृषि क्षेत्र में फर्जीवाड़े के खिलाफ अभियान चला रही है। हाल ही में कृषि मंत्री ने बीज गोदामों पर भी छापेमारी की थी और मिलावटी बीजों की बड़ी खेप पकड़ी थी। अब यह विश्वविद्यालय शिक्षा क्षेत्र में चल रहे फर्जीवाड़े की कड़ी बन गया है। सूत्रों की मानें तो मेवाड़ यूनिवर्सिटी अकेली ऐसी संस्था नहीं है, बल्कि राजस्थान की कई अन्य निजी यूनिवर्सिटियां भी जांच के घेरे में हैं।
मेवाड़ यूनिवर्सिटी का बचाव और सरकार का रुख
इस पूरे मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डीडी कुमावत ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय के सभी कोर्स यूजीसी और कृषि विश्वविद्यालयों के मानकों के अनुसार हैं। हालांकि, वे इस दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं कर पाए।
वहीं, मंत्री मीणा ने साफ कहा है कि इस मामले की आधिकारिक जांच कराई जाएगी और दोषी संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि जो संस्थान युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं और शिक्षा प्रणाली की साख को चोट पहुंचाते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
शिक्षा में पारदर्शिता की मांग
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या निजी शिक्षण संस्थानों पर पर्याप्त निगरानी रखी जा रही है? यदि फर्जी डिग्रियों का ऐसा गोरखधंधा शिक्षा के नाम पर चलता रहा, तो समाज में योग्यताओं का मूल्य ही खत्म हो जाएगा। राज्य सरकार की यह कार्रवाई एक सकारात्मक पहल है, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच निष्पक्ष हो और भविष्य में इस तरह के फर्जी संस्थानों पर समय रहते लगाम लगे।
मेवाड़ यूनिवर्सिटी में फर्जी कृषि डिग्री घोटाले ने शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह जरूरी है कि ऐसे मामलों में सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता और निगरानी की स्थायी व्यवस्था भी बनाई जाए। इससे छात्रों और किसानों दोनों का हित सुरक्षित रह सकेगा और शिक्षा का स्तर मजबूत होगा।