स्वामी प्रेमानंद पुरी का विवादित बयान: साईं की मूर्ति कुएं में फेंको, फोटो जला दो
उज्जैन में निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद पुरी ने साईं बाबा को लेकर बेहद विवादित बयान देते हुए एक बार फिर धार्मिक माहौल को गर्म कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “अगर घर में साईं की मूर्ति है तो कुएं में फेंक दो और फोटो है तो आग लगा दो।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब हमारे पास 84 करोड़ देवी-देवता हैं तो एक मुसलमान फकीर की पूजा क्यों की जाए?
स्वामी प्रेमानंद पुरी उज्जैन के पंचकोशी मार्ग स्थित एक होटल में 25 जुलाई से चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बोल रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई मंदिरों में साईं की मूर्तियां लगी हैं, जिन्हें तत्काल हटाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, कुछ जगहों पर मंदिरों में आए दान का पैसा कसाई खाने चलाने में उपयोग किया जा रहा है।
प्रेमानंद पुरी ने मंदिरों में हिंदू कार्ड प्रणाली लागू करने की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिरों में प्रवेश के लिए केवल उन्हीं लोगों को अनुमति दी जाए जिनके पास हिंदू कार्ड हो, ताकि धर्म के नाम पर हो रही अराजकता रोकी जा सके।
महाकाल मंदिर को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले महाकाल मंदिर महानिर्वाणी अखाड़े के अधीन था, लेकिन अब यह सरकार के अधिग्रहण में है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि देश के सभी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए और पुनः अखाड़ों को सौंपा जाए।
प्रेमानंद पुरी का यह कोई पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी वे कथाओं के मंच से कई बार भड़काऊ और उग्र बयान दे चुके हैं।
कब और कैसे शुरू हुआ साईं बाबा का विरोध?
साईं बाबा की पूजा के खिलाफ अभियान की शुरुआत अक्टूबर 2015 में हुई, जब शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने इसे लेकर मोर्चा खोला था। उन्होंने साईं बाबा को मुस्लिम फकीर बताते हुए हिंदुओं से कहा था कि वे साईं बाबा की पूजा न करें। स्वरूपानंद ने दावा किया था कि साईं का असली नाम चांद मियां था और उन्हें देवता का दर्जा देना हिंदू धर्म के खिलाफ है।
उन्होंने एक विवादित पोस्टर भी जारी किया था, जिसमें भगवान हनुमान साईं बाबा को खदेड़ते हुए दिखाए गए थे और लिखा था – “हनुमान जी ने साईं चांद मियां को खदेड़ा।” उनका तर्क था कि साईं बाबा को भगवान हनुमान से भी ऊपर दिखाया जा रहा है, जो हिंदू संस्कृति और आस्था के विरुद्ध है।
धीरेंद्र शास्त्री भी कर चुके हैं विरोध
बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी अप्रैल 2023 में साईं बाबा की पूजा का विरोध किया था। उन्होंने कहा था, “साईं बाबा हिंदू देवता नहीं हैं। उन्हें संत या फकीर कहा जा सकता है, लेकिन भगवान नहीं।” उन्होंने यहां तक कह दिया था कि “कोई गिद्ध शेर बनने का नाटक नहीं कर सकता।”
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि शंकराचार्य हिंदू धर्म के ‘प्रधानमंत्री’ हैं और यदि उन्होंने साईं बाबा को देवता का दर्जा नहीं दिया है, तो हर सनातनी को इसका पालन करना चाहिए। उनके इस बयान पर देशभर में विवाद खड़ा हुआ और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज हुई थी।
धर्म की राजनीति और आस्था की सीमाएं
साईं बाबा को लेकर बार-बार हो रहे विवादों ने धर्म और आस्था की राजनीति को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। एक ओर जहां साईं बाबा को करोड़ों श्रद्धालु पूजते हैं, वहीं दूसरी ओर संत समाज का एक वर्ग उन्हें देवता मानने को तैयार नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या ऐसे बयान सांप्रदायिक सौहार्द को ठेस नहीं पहुंचाते